VASTU DIPLOMA
Faculty of Vastu Diploma
Dr. Ramananda Bhat N |
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने वर्ष 2016 में वास्तु ज्योतिष में एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया।.
वास्तु-शास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जिसमें भारतीय परंपरागत स्थापत्य प्रणाली उपलब्ध है। इसे स्थापत्य विज्ञान भी कहा जाता है। यह विज्ञान प्रकृति के पाँच तत्वों पर आधारित है, जिसमें भवन निर्माण से संबंधित दिशा-निर्देशों का स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है। ये पाँच मूल तत्व हैं—पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश। इस शास्त्र का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के मूल तत्वों की सहायता से मनुष्य और भौतिक पदार्थों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
घर मनुष्य की न्यूनतम आवश्यकता है। एक अच्छा घर न केवल आरामदायक जीवन प्रदान करता है, बल्कि घर के मालिक को उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और धन भी प्रदान करता है। जब हमारा घर वास्तु सिद्धांतों का पालन करके बनाया जाता है, तब हम उपर्युक्त सभी लाभों का अनुभव कर सकते हैं।
ज्योतिष को सामान्यतः प्रकाश अथवा खगोलीय पिंडों का विज्ञान कहा जाता है और शास्त्र का अर्थ किसी विशेष क्षेत्र का सत्य ज्ञान होता है। ज्योतिष शास्त्र मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित है—सिद्धांत, संहिता और होरा। होरा शास्त्र हमारे समाज में सामान्य जन के बीच भविष्यवाणी ज्योतिष के रूप में अत्यंत प्रसिद्ध है। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र परस्पर संबंधित हैं। वास्तु शास्त्र भी ज्योतिष का एक अंग है और यह ज्योतिष के संहिता भाग के अंतर्गत आता है। वास्तु और ज्योतिष—दोनों ही हमारे समाज के लिए आवश्यक हैं।
लाभ –
1. संस्कृत संभाषण का ज्ञान प्राप्त होता है।
2. संस्कृत व्याकरण की मूलभूत जानकारी मिलती है।
3. ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान प्राप्त होता है।
4. कुंडली निर्माण की पारंपरिक विधि का ज्ञान होता है।
5. वास्तु शास्त्र का ज्ञान प्राप्त होता है।
6. आधुनिक वास्तु तथा उसके उपयोगों का ज्ञान प्राप्त होता है।
“हमारे परिसर में निम्नलिखित पाठ्यक्रम (सिलेबस) प्रदान किए जाते हैं:”
Diploma Syllabus